उत्तराखंड कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग ने प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा, जानिए किन नेताओं को मिली जगह

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग ने प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव को पूरी मजबूती के साथ लड़ा जा सके. इसी कड़ी में पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने प्रदेश महामंत्री, सचिवों और उपाध्यक्षों की घोषणा की गई. प्रकोष्ठ का कहना है कि जिला, महानगर और एडवाइजरी कमेटी की घोषणा होना अभी बाकी है, जिसकी तैयारियां लगभग पूर्ण हो गई है.

कांग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सुलेमान अली ने प्रदेश कार्यकारिणी के नए पदाधिकारियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दी है. उन्होंने नए पदाधिकारियों से उम्मीद जताई है कि सभी मिलजुल कर संगठन को मजबूत बनाने में अपना योगदान देंगे, ताकि 2027 के चुनावी रण में पार्टी को जीत हासिल हो सके. फिलहाल उत्तराखंड कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग ने 24 उपाध्यक्ष, 34 महासचिव, 65 सचिव, पांच प्रवक्ताओं और एक सोशल मीडिया प्रभारी की घोषणा की है.

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उन्होंने बताया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी और इस बार प्रदेश की 70 विधानसभाओं में टीम बनाकर काम किया जाएगा. इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में कई विकास कार्य हुए, जबकि भाजपा सरकार ने कांग्रेस की ओर से तैयार किए गए संस्थानों और योजनाओं को नुकसान पहुंचाने का काम कर रही है.

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सुलेमान अली ने पेपर लीक और युवाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि युवा वर्षों तक मेहनत और तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है. उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की समस्याओं और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर गंभीरता से काम करना चाहिए.

सुलेमान अली ने कहा कि किसी भी धर्म के धार्मिक स्थल को बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया के नहीं तोड़ा जाना चाहिए. यदि कोई निर्माण अवैध है तो उसकी जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है तो कानून के तहत उसे सजा दी जानी चाहिए, लेकिन उसके परिवार को दंडित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मकान तोड़े जाने की कार्रवाई से परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो जाती है, इसलिए ऐसी कार्रवाई कानून के दायरे में ही होनी चाहिये.