उत्तराखंड: धामी सरकार हरिद्वार के 120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 105 घाटों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने पर मंथन कर रही है. यह कदम कुछ संतों और हरिद्वार के मुख्य हर-की-पौड़ी घाट के रखरखाव की देखरेख करने वाली संस्था गंगा सभा की माँग के बाद उठाया गया है. इसके अलावा धामी सरकार ऋषिकेश और हरिद्वार को ‘पवित्र नगर’ घोषित करने की भी योजना बना रही है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नियम अगले साल 2027 में हरिद्वार में होने जा रहे अर्धकुंभ से लागू किए जाएँगे। फिलहाल सरकार हरिद्वार के हर-की-पौड़ी घाट पर पिछले 110 सालों से लागू नियमों पर अध्ययन कर रही है. घाट के बॉयलॉज में साफ लिखा गया है कि 1916 में ब्रिटिश काल से ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के नियम हैं.
हरिद्वार के हर-की-पौड़ी घाट स्थित नगर निगम क्षेत्र के बायलॉज में भारत रत्न से सम्मानित पंडित मदन मोहन मालवीय और अंग्रेजों के बीच साल 1916 में हुए समझौते का विवरण है. मालवीय गंगा सभा के पहले अध्यक्ष थे. 1916 के इस समझौते का उद्देश्य तीर्थ नगर की पवित्रता को संरक्षित करना था.
इस समझौते में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का नियम बनाया गया था. इसमें साफ कहा गया था कि गैर-हिंदुओं को ऋषिकेश और हरिद्वार में स्थायी निवास करने की अनुमति नहीं थी और वे केवल काम के लिए आ सकते थे और अपना काम पूरा करके वापस जा सकते थे. मौजूदा धामी सरकार ने मूल समझौतों के प्रावधानों को ही बहाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है.
उत्तराखंड की धामी सरकार के 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव के पीछे लगातार उठ रही माँगे हैं. हाल ही में यह आवाज श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने उठाई है. उन्होंने कहा कि हरिद्वार की पवित्रता बनाए रखने के लिए पूरे कुंभ मेले और हरिद्वार को गैर-हिंदू मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए और उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.
नितिन गौतम पहले भी विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष (हरिद्वार) रहते हुए यह माँग कर चुके हैं. नितिन गौतम की इस माँग पर संत समाज, अखाड़ा परिषद, पंडा समाज ने भी सहमति जताई है. निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशनंद गिरि जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस बारे में जरूर निर्णय लेंगे क्योंकि वो ‘धर्म रक्षक धामी’ हैं.
माँ गंगा की पवित्र नगरी हरिद्वार में गैर-हिंदुओं पर प्रतिबंध लगाने की सही में जरूरत है और धामी सरकार का यह फैसला हाल ही में सामने आई घटनाओं पर लगाम लगाने की ठोस कार्रवाई साबित होती है। हरिद्वार के गंगा घाटों पर कभी शराब पार्टियाँ करते, तो कभी अश्लील काम करते लोगों के वीडियो सामने आते हैं.
ऐसे में यह जरूरी है कि धार्मिक नगरी को संरक्षित रखने के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश के घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाएँ.
