गंगोत्री यमुनोत्री में स्नोफॉल, हर्षिल घाटी ने ओढ़ी बर्फ की चादर, बढ़ी ठिठुरन

गंगोत्री व यमुनोत्री धाम सहित जनपद के ऊंचाई वाले इलकों में बीते कुछ दिनों से अच्छी बर्फबारी हो रही है. वहीं, निचले इलाकों में हुई बारिश के कारण तापमान में भारी गिरावट देखने को मिली. बर्फबारी के बाद सेब और अन्य फसलों के काश्तकारों के चेहरे खिल उठे हैं. उनका कहना है कि मार्च माह में बारिश और बर्फबारी फसल के पैदावार के लिए उपयोगी साबित होती है.

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में करीब सात से आठ इंच बर्फ जमी हुई है. साथ ही हर्षिल और जनपद के गीठ, मोरी आदि के ऊंचाई वाले गांव में लगभग तीन से चार इंच बर्फ गिरी है. निचले इलाकों में बारिश के बाद दिन भर बादल छाए रहे. इस कारण तापमान में भारी गिरावट देखने को मिली है.

मार्च माह में हुई इस बारिश और बर्फबारी का लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. बारिश न होने के कारण फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई थी. अब काश्तकारों को राहत मिली है. इस बर्फबारी के बाद गंगोत्री यमुनोत्री धाम सहित हर्षिल घाटी सफेद चादर में बहुत ही खूबसूरत दिख रहा है.

गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित राजेश सेमवाल ने बताया बीते रविवार से गंगोत्री धाम सहित अन्य जगहों पर जमकर बर्फबारी हो रही है. बर्फबारी के कारण तापमान में भारी गिरावट आ रही है.

वहीं, काश्तकार संजय पंवार ने बताया कि बर्फबारी होने से सेब और अन्य फसलों के पैदावार के लिए उपयोगी साबित होगी. कहीं दिनों से बारशि न होने के कारण फसल बर्बाद होने की कागार पर आ गए थे, लेकिन कुछ दिनों से बारिश और बर्फबारी होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. उन्होंने कहा कि बर्फबारी से सबसे ज्यादा फयादा सेब के लिए हुआ है.

बता दें मौसम विभाग ने आज भी कई इलाकों में बारिश और बर्फबारी को लेकर अलर्ट जारी किया है. 3000 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने का अंदेशा है. हरिद्वार, उधम सिंह नगर, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और चंपावत जनपदों में कहीं-कहीं गरज के साथ बारिश का अनुमान है.