दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में जेल में बंद बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को 18 मार्च तक की अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को करने का आदेश दिया.
आज सुबह जब सुनवाई शुरु हुई को कोर्ट ने कहा कि जब राजपाल यादव दोपहर तीन बजे तक पैसे जमा करेंगे तो उनकी जमानत पर विचार किया जाएगा. दोपहर तीन बजे कोर्ट को बताया गया कि इस मामले के शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के खाते में डेढ़ करोड़ रुपये जमा कर दिए गए हैं. उसके बाद कोर्ट ने राजपाल यादव को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत पर 18 मार्च तक रिहा करने का आदेश दिया.
बता दें कि 12 फरवरी को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजपाल यादव के व्यवहार पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी लेकिन कोई राहत नहीं मिली. इसके पहले 5 फरवरी को हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए तुरंत सरेंडर करने को कहा था जिसके बाद राजपाल यादव ने जेल में सरेंडर कर दिया था.
राजपाल यादव को कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी, हालांकि जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि राजपाल यादव आदतन अपराधी नहीं हैं इसलिए उनकी सजा निलंबित की जाती है. दरअसल कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस केस में दोषी करार देने के बाद राजपाल यादव पर 1करोड़ 60 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था. कड़कड़डूमा कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा पर भी 10 लाख रुपये प्रति केस जुर्माना लगाया था। दोनों को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में यह सजा सुनाई गई थी.
शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट को बताया था कि राजपाल ने अप्रैल 2010 में फिल्म अता पता लापता पूरी करने के लिए कंपनी से मदद मांगी थी. 30 मई 2010 में दोनों के बीच करार हुआ और उन्होंने राजपाल यादव की कंपनी को 5 करोड़ का लोन दे दिया. करार के मुताबिक राजपाल को ब्याज सहित आठ करोड़ रुपए लौटाने थे. लेकिन वह पहली बार ये रकम नहीं लौटा सके. उसके बाद दोनों के बीच तीन बार करार का रिनिवल हुआ. 9 अगस्त 2012 को वह अंतिम करार में आरोपी राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता को 11 करोड़ 10 लाख 60 हजार 350 रुपए लौट आने की सहमति भी थी. राजपाल यादव की कंपनी यह भी पैसा देने में नाकाम रही.
अपने बचाव में राजपाल यादव ने कोर्ट को बताया था कि उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से कोई उधार नहीं लिया था. राजपाल यादव के मुताबिक मुरली प्रोजेक्ट की कंपनी में पैसा निवेश किया था। लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी दलील को अस्वीकार करते हुए उन्हें चेक बाउंस का दोषी पाया था.
