उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों के निशानेबाजों का जमावड़ा लगा हुआ है. देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज त्रिशूल शूटिंग एकेडमी में उत्तर भारत के 10 राज्यों के 7 हजार से ज्यादा शूटर नॉर्थ जोनल प्रतियोगिता मे भाग ले रहे हैं. नॉर्थ जोनल प्रतियोगिता 4 से 16 अक्टूबर तक चलेगी.
4 अक्टूबर से शुरू हुई यह चैंपियनशिप 16 अक्टूबर 2025 तक चलेगी. जिसमें नॉर्थ जोन यानी उत्तर भारत के तकरीबन 7000 से ज्यादा शूटिंग एथलीट भाग ले रहे हैं. 12 दिनों तक चलने वाली इस शूटिंग चैंपियनशिप में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एंडकश्मीर, लद्दाख, पंजाब, चंडीगढ़ हरियाणा और राजस्थान के 7066 खिलाड़ी प्रतिभा कर रहे हैं. यही नहीं इस प्रतियोगिता में आइटीबीपी, ओएनजीसी, बीएसएफ, सीआईएसएफ और भारतीय सेवा के भी शूटर प्रतिभा कर रहे हैं. देहरादून त्रिशूल शूटिंग रेंज में चल रही इस नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप में उत्तराखंड के 300 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं.
उत्तराखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन, प्रदेश में पहली दफा आयोजित हो रही इस चैंपियनशिप को लेकर बेहद उत्साहित नजर आ रहा है. एसोसिएशन का कहना है कि इसका उत्तराखंड के शूटर्स को काफी लाभ मिलेगा. उत्तराखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन के सेक्रेटरी और द्रोणाचार्य अवॉर्ड शूटर सुभाष राणा ने बताया कि राष्ट्रीय खेलों के बाद उत्तराखंड में बड़ी बड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं. जिससे खिलाड़ियों को लाभ मिल रहा है.
शूटिंग में उत्तराखंड के बेहतर भविष्य के बारे में सुभाष राणा ने कहा उत्तराखंड में इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग पर अब काफी अच्छा काम किया जाने लगा है. जिसके परिणाम निकट भविष्य में देखने को मिलेंगे. त्रिशूल शूटिंग रेंज के मेंटोर अरुण सिंह ने बताया जोनल चैंपियनशिप से तकरीबन 30 से 40 फीस दी एथलीट नेशनल के लिए सिलेक्ट होते हैं. इस बार भी उम्मीद लगाई जा रही है की बड़ी संख्या में एथलीट नॉर्थ जोन से नेशनल के लिए सिलेक्ट होंगे.
देशभर में शूटिंग प्रतियोगिता में अगर बात की जाये तो नॉर्थ जोन के हरियाणा, पंजाब जैसे कुछ एक राज्यों को छोड़कर साउथ के राज्यों का दबदबा रहता है. ऐसे में उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों को अभी भी काफी मेहनत की जरूरत है. ऐसे में उत्तराखंड में चल रही चैंपियनशिप से उत्तर भारत के इन राज्यों को क्या कुछ लाभ होगा? इसको लेकर हमने आयोजकों से बातचीत की. उत्तर प्रदेश स्टेट राइफल संगठन के उपाध्यक्ष रामेंद्र कुमार शर्मा ने बताया अब तक हरियाणा और पंजाब को छोड़कर उत्तर भारत के राज्यों में संसाधनों और ट्रेनिंग की बेहद कमी थी. जिस वजह से यहां के खिलाड़ियों को बेहतर प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता था. उन्होंने बताया राष्ट्रीय खेलों के दौरान त्रिशूल शूटिंग रेंज को डेवलप किया गया है. इसमें राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के संसाधनों को लाया गया है. निश्चित तौर से इसका लाभ उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को भी होगा.
देहरादून में चल रही नॉर्थ जॉन शूटिंग चैंपियनशिप प्रतियोगिता में उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों के पहाड़ी क्षेत्र से आने वाले एथलीट के लिए शूटिंग गेम कितना व्यवहारिक है? किस तरह से पहाड़ों पर संघर्ष के बीच में निशानेबाजी जैसे महंगे खेल में नौनिहाल आगे आ सकते हैं? इस सवाल का भी जवाब अभिभावकों से तलाशने की कोशिश की. हिमाचल शिमला से आने वाले एक शूटर एथलीट के अभिभावक मेजर सनी बग्गा ने बताया उनकी पुत्री शूटिंग एथलीट है. देहरादून में शूटिंग रेंज बनने से उन्हें काफी फायदा हुआ है. उन्होंने कहा इस खेल में महंगे इक्विपमेंट तो जरूर लगते हैं लेकिन उसके साथ-साथ मोटिवेशन और डिसिप्लिन भी बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया आर्मी बैकग्राउंड से होने की वजह से उनके परिवार में अनुशासन पहली प्राथमिकता है. वहीं उनकी बेटी शूटिंग एथलीट उद्भवी ने बताया वे खुद को भारतीय टीम में देखना चाहती हैं. शूटर मयंक ने बताया वह 10 मीटर और 25 एम पिस्टल शूटर हैं. 10 मीटर में उनका नेशनल क्वालीफाई हो चुका है. 25 मीटर में वह इस प्रतियोगिता में क्वालीफाई करने के लिए आए हैं.
देहरादून में चल रही नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप में उत्तराखंड के तकरीबन 474 छात्र इस चैंपियनशिप में भाग ले रहे हैं. उत्तराखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन अध्यक्ष नारायण सिंह राणा ने कहा शूटिंग बिल्कुल अलग विधा है. जिसमें महंगे उपकरण और रेंज की जरूरत होती है. उन्होंने कहा आज पहाड़ों में अमूमन ज्यादातर बच्चे क्रिकेट को ही अपनाते हैं. उन्होंने कहा तीरंदाजी और निशानेबाजी दोनों ऐसे खेल हैं जिनका माहौल अभी हमारे यहां बहुत कम है. धीरे-धीरे यह बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा इन खेलों में रुचि रखने वाले खिलाड़ियों को लेकर उत्तराखंड के यह दोनों संगठन बहुत अच्छे से कम कर रहे हैं. तकरीबन सारे जिलों में उसे संगठन ने अपनी जिला इकाइयों को स्थापित कर दिया है. उन्होंने बताया इसी कोशिश के चलते इस प्रतियोगिता में पहाड़ों से भी बड़ी संख्या में बच्चे यहां पर प्रतिभा कर रहे हैं. उत्तराखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुभाष राणा ने कहा अगर निशानेबाजी की विधा पहाड़ पर चढ़ाना है तो इसके लिए सरकार को आगे बढ़कर काम करना होगा.
