मियांवाला नहीं इस्लामी नाम, पहाड़ी राजपूतों से है कनेक्शन, आक्रोशित जनता ने उठाये सवाल

उत्तराखंड सरकार ने 2 दिन पहले उत्तराखंड के 17 स्थानों का नाम बदलकर नया नामकरण किया. इस कदम के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गुरुवार को कई लोगों ने धन्यवाद भी किया. बाकायदा इसके लिए एक कार्यक्रम रखा गया. जिसमें हरिद्वार, उधम सिंह नगर और देहरादून के कई लोग शामिल हुए. लेकिन राजधानी देहरादून के मियांवाला का नाम बदले जाने पर मियांवाला के लोग नाखुश हैं. उन्होंने सरकार से मियांवाला जगह का नाम न बदलने की गुजारिश की है. इसके पीछे उन्होंने तर्क भी दिया है कि मियां किसी धर्म विशेष या विशेष समुदाय का नहीं, उत्तराखंड के ही पहाड़ी मूल के राजपूत से जुड़ा उपनाम है.

मियांवाला के रहने वाले दीपेंद्र चौधरी कहते हैं कि कुछ लोग जानबूझकर इस तरह की हरकत कर रहे हैं. वह हमारे पूर्वजों और हमारी इस धरोहर को बदनाम कर रहे हैं. कुछ लोगों को लगता है कि मियांवाला इस्लामी नाम है. जबकि ऐसा नहीं है. यह हमारे पूर्वजों का उपनाम है. यह नाम गुरु राम राय से भी पहले का है. यहां पर हमारे पूर्वज ही रहा करते थे. आज भी हम लोग यहीं पर रहते हैं. लेकिन कुछ लोग अपनी राजनीति के चक्कर में हमारा नाम और हमारा अस्तित्व मिटाने की कोशिश कर रहे हैं. हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे. हमारे घर, परिवार, खेत-खलियान,चौक-चौराहे सभी मियांवाला के नाम से प्रसिद्ध हैं और इसका नाम बदलना बेहद गलत है.

Miyanwala renamed

मियांवाला में रहने वाले सोम प्रकाश बताते हैं कि सरकार को पहले इसका इतिहास पढ़ना चाहिए था. साल 1676 में यह गांव अस्तित्व में आया था. 1717 से लेकर 1772 तक प्रदीप शाह के शासन के दौरान भी यहां पर मियां लोग रहते थे. पुरानी किताबों में भी इसका जिक्र मिल जाएगा. लेकिन अब इसका नाम बदलकर इस स्थान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. लगभग 60 साल के सोम प्रकाश कहते हैं कि इस नाम को बदलने से पहले किसी से भी ना तो पूछा गया और ना ही कोई राय ली गई.

वहीं स्थानीय युवा लोग भी चाहते हैं कि अगर मियांवाला का नाम बदलना है तो पहले इसका पूरा सर्वे किया जाए. लोगों से बातचीत की जाए और उसके बाद इस नाम का परिवर्तन किया जाए. आज सभी स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी देहरादून को भी इस बाबत एक ज्ञापन दिया है. यह मांग की है कि पुराने स्वरूप और पुराने नाम को ना छेड़ा जाए.