वे सब अपने मजहबी ग्रंथ वेदों के जानकार हैं, जो रोजाना पूजा, हवन और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, और भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं. लेकिन जब वही पूजारी क्रिकेट के मैदान पर उतरते हैं, तो वो निडर बल्लेबाज और तेज गेंदबाज बन जाते हैं. विराट कोहली-रोहित शर्मा की तरह रन बनाकर और जसप्रीत बुमराह-हार्दिक पांड्या की तरह तेजी से विकेट लेकर, ये पुजारी साबित कर रहे हैं कि परंपरा और खेल साथ-साथ चल सकते हैं.
बता दें कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के पुजारी, अर्चक और वैदिक विद्वान इस समय राज्य स्तरीय क्रिकेट लीग के तीसरे सीजन में अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, जो आंध्र के गन्नाबट्टुला स्पोर्ट्स ग्राउंड में चल रहा है. उनके शानदार प्रदर्शन ने न केवल दर्शकों को प्रभावित किया है, बल्कि कई टीमों को ट्रॉफी जीतने में भी मदद की है.
इन पुजारियों में पर्वतीपुरम मान्यम टीम के कप्तान आर. वेंकट साई कुमार की कहानी प्रेरणादायक है. उन्होंने कहा, ‘मैं पहले ही 60 क्रिकेट मैच खेल चुका हूं. एक कप्तान के तौर पर मैंने चार ट्रॉफियां भी जीते हैं.’ कई खेलों में माहिर, वेंकट साई कुमार ने लगभग 50 जोनल-स्तरीय वॉलीबॉल मैच भी खेले हैं और एक अंतर्राष्ट्रीय-स्तरीय ट्रॉफी भी जीता है. बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने वैदिक अध्ययन में प्रतिष्ठा कल्प किया. उन्होंने कहा, ‘फिलहाल, मैं सात गांवों में पुजारी के तौर पर सेवा कर रहा हूं.’
हैदराबाद के नौदुरु सुब्रह्मण्य शर्मा ने तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय से वेदों में मास्टर किया है. उन्होंने कहा, ‘मैं सचिन तेंदुलकर का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं. इसी तरह क्रिकेट में मेरी दिलचस्पी शुरू हुई.’ 10 टूर्नामेंट और लगभग 40 मैच खेलने के बाद, उन्होंने चार ट्रॉफियां जीते हैं और एक ऑलराउंडर के रूप में पहचान बनाई है. उन्होंने कहा, ‘मेरा लक्ष्य एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाना है.’
हैदराबाद टीम के कप्तान मुक्कराला सिद्धार्थ शर्मा भक्ति और खेल के बीच समान जुनून के साथ संतुलन बनाते हैं. उन्होंने कहा, ‘क्रिकेट मेरी जान है.’ एक विद्वान, सिद्धार्थ, सीता राम कल्याणम और विभिन्न हवन करने के लिए अमेरिका और इंग्लैंड की भी यात्रा करते हैं. उन्होंने 12 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है और चार ट्रॉफियां जीते हैं. उन्होंने कहा, अशुभ समय में, पुजारियों के पास आमतौर पर खाली समय होता है. हम उस समय का इस्तेमाल क्रिकेट खेलने और इस खेल में पहचान बनाने के लिए करते हैं.’
हैदराबाद के नागोल के गंगाधरा गौतम कुमार शर्मा अवधानी ने कृष्ण यजुर्वेद पूरा कर लिया है और अभी कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने खाली समय में अपनी रुचि के कारण क्रिकेट सीखा.’ लगभग 40 मैच और तीन टूर्नामेंट खेलने के बाद, उन्होंने दो ट्रॉफी जीते हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे बैटिंग सबसे ज्यादा पसंद है.’
ये विद्वान-क्रिकेटर पुरानी सोच को बदल रहे हैं, यह साबित कर रहे हैं कि आध्यात्मिक शिक्षा के प्रति समर्पण खेल में बेहतरीन प्रदर्शन के साथ-साथ चल सकता है. पवित्र ग्रंथों से लेकर क्रिकेट पिच तक का उनका सफर युवा पीढ़ी के लिए एक अनोखा और प्रेरणादायक उदाहरण है.
