भारत में पहली बार एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी का आयोजन, देहरादून में बनेगा इतिहास

राजधानी देहरादून में बना बर्फीला ट्रैक एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है. क्योंकि भारत पहली बार एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी की मेजबानी करने जा रहा है, जिसका आयोजन देहरादून आइस स्केटिंग रिंक में होगा. इस आयोजन में 11 देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे. एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी 2025 का आयोजन 20 से 23 अगस्त तक राजधानी देहरादून में होगा.

दरअसल, भारत पहली बार शीतकालीन खेलों का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन करने जा रहा है. इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में एशिया के 11 देश- चीन, जापान, हांगकांग, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, चीनी ताइपे, वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस और भारत हिस्सा लेंगे. खिलाड़ी 222 मीटर स्प्रिंट से लेकर 5000 मीटर रिले तक की 9 अलग-अलग प्रतिस्पर्धाओं में दमखम दिखाएंगे. 20 अगस्त से देहरादून में होने जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय इवेंट में भारत के 91 खिलाड़ी भाग लेंगे. वहीं 11 एशियाई देशों के करीब डेढ़ सौ विदेशी खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा का जलवा दिखाएंगे.

इस चैंपियनशिप के लिए आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने शनिवार को मस्कट और LOGO भी लॉन्च किया. मस्कट को स्नो टाइगर के रूप में पेश किया गया है. वहीं LOGO में भारतीय ध्वज और अमर ज्योति के साथ स्केट्स को दर्शाया गया है, जो देश की ऊर्जा और गौरव का प्रतीक है.

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देहरादून का हिमाद्री आइस रिंक, जो देश का इकलौता ओलंपिक स्टैंडर्ड का आइस रिंक है, वो इस इंटरनेशनल आयोजन का केंद्र बनेगा. बता दें कि देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में लंबे समय से बंद रहे आइस स्केटिंग रिंक अब पूरी तरह से कायापलट हो चुकी है. पिछले तीन महीनों से लगातार यहां पर इंवेंट चल रहे हैं. इस दौरान यहां पर हाल में राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन भी हो चुका है.

आइस स्केटिंग अब पहाड़ी इलाकों से निकलकर महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक तक पहुंच चुकी है. इस साल हार्बिन (चीन) में हुए एशियन विंटर गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ी एकलव्य जगल, सोहन टरकर, साई सहाना, सुयोग तापकीर, डेशियल कॉन्सेसाओ, नॉयल सी. चेरियन और अन्य भी इस भव्य आयोजन का हिस्सा होंगे. देहरादून में होने वाला यह टूर्नामेंट सिर्फ मेडल की जंग नहीं, बल्कि भारत में विंटर स्पोर्ट्स के नए युग की शुरुआत है.

आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली हैं. इसका मकसद भारत को 2027 में होने वाले जूनियर वर्ल्ड कप की मेजबानी और उसके बाद ओलंपिक खेलों के लिए खिलाड़ियों को तैयार करना है. देश के शीतकालीन खेलों के इतिहास में यह टूर्नामेंट एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगा.